महाभारत 5.18.13
दुराचारश्च नहुषो ब्रह्मद्विट्पापचेतनःअगस्त्यशापाभिहतो विनष्टः शाश्वतीः समाः
durācāraśca nahuṣo brahmadviṭpāpacetanaḥagastyaśāpābhihato vinaṣṭaḥ śāśvatīḥ samāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें