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महाभारत 5.18.1
शल्य उवाच · śalya uvāca
ततः शक्रः स्तूयमानो गन्धर्वाप्सरसां गणैःऐरावतं समारुह्य द्विपेन्द्रं लक्षणैर्युतम्
tataḥ śakraḥ stūyamāno gandharvāpsarasāṃ gaṇaiḥairāvataṃ samāruhya dvipendraṃ lakṣaṇairyutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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