महाभारत 5.181.9
ततस्त्वस्त्राणि दिव्यानि जामदग्न्यः प्रतापवान्मयि प्रचोदयामास तान्यहं प्रत्यषेधयम्
tatastvastrāṇi divyāni jāmadagnyaḥ pratāpavānmayi pracodayāmāsa tānyahaṃ pratyaṣedhayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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