महाभारत 5.182.2
ततो दिव्यास्त्रविच्छूरो दिव्यान्यस्त्राण्यनेकशःअयोजयत धर्मात्मा दिवसे दिवसे विभुः
tato divyāstravicchūro divyānyastrāṇyanekaśaḥayojayata dharmātmā divase divase vibhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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