महाभारत 5.184.18
इत्युक्त्वान्तर्हिता राजन्सर्व एव द्विजोत्तमाःअष्टौ सदृशरूपास्ते सर्वे भास्वरमूर्तयः
ityuktvāntarhitā rājansarva eva dvijottamāḥaṣṭau sadṛśarūpāste sarve bhāsvaramūrtayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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