महाभारत 5.184.8
त एव मां महाराज स्वप्नदर्शनमेत्य वैपरिवार्याब्रुवन्वाक्यं तन्निबोध कुरूद्वह
ta eva māṃ mahārāja svapnadarśanametya vaiparivāryābruvanvākyaṃ tannibodha kurūdvaha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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