महाभारत 5.185.19
ऋषयश्च सगन्धर्वा देवताश्चैव भारतसंतापं परमं जग्मुरस्त्रतेजोभिपीडिताः
ṛṣayaśca sagandharvā devatāścaiva bhāratasaṃtāpaṃ paramaṃ jagmurastratejobhipīḍitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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