महाभारत 5.192.20
यक्षेणर्द्धिमता राजन्स्थूणाकर्णेन पालितम्तद्भयादेव च जनो विसर्जयति तद्वनम्
yakṣeṇarddhimatā rājansthūṇākarṇena pālitamtadbhayādeva ca jano visarjayati tadvanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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