महाभारत 5.192.26
ततः शिखण्डी तत्सर्वमखिलेन न्यवेदयत्तस्मै यक्षप्रधानाय स्थूणाकर्णाय भारत
tataḥ śikhaṇḍī tatsarvamakhilena nyavedayattasmai yakṣapradhānāya sthūṇākarṇāya bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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