महाभारत 5.193.27
ततः कृत्वा तु राजा स आगमं प्रीतिमानथसंबन्धिना समागम्य हृष्टो वासमुवास ह
tataḥ kṛtvā tu rājā sa āgamaṃ prītimānathasaṃbandhinā samāgamya hṛṣṭo vāsamuvāsa ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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