महाभारत 5.196.8
स्वैः स्वैरनीकैः सहिताः परिवार्य महारथम्एते महारथाः सर्वे द्वितीये निर्ययुर्बले
svaiḥ svairanīkaiḥ sahitāḥ parivārya mahārathamete mahārathāḥ sarve dvitīye niryayurbale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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