महाभारत 5.20.2
सर्वं कौशल्यमुक्त्वादौ पृष्ट्वा चैवमनामयम्सर्वसेनाप्रणेतॄणां मध्ये वाक्यमुवाच ह
sarvaṃ kauśalyamuktvādau pṛṣṭvā caivamanāmayamsarvasenāpraṇetṝṇāṃ madhye vākyamuvāca ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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