महाभारत 5.3.16
को हि गाण्डीवधन्वानं कश्च चक्रायुधं युधिमां चापि विषहेत्को नु कश्च भीमं दुरासदम्
ko hi gāṇḍīvadhanvānaṃ kaśca cakrāyudhaṃ yudhimāṃ cāpi viṣahetko nu kaśca bhīmaṃ durāsadam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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