महाभारत 5.3.2
सन्ति वै पुरुषाः शूराः सन्ति कापुरुषास्तथाउभावेतौ दृढौ पक्षौ दृश्येते पुरुषान्प्रति
santi vai puruṣāḥ śūrāḥ santi kāpuruṣāstathāubhāvetau dṛḍhau pakṣau dṛśyete puruṣānprati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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