महाभारत 5.31.14
एवं पूर्वापरान्क्लेशानतितिक्षन्त पाण्डवाःयथा बलीयसः सन्तस्तत्सर्वं कुरवो विदुः
evaṃ pūrvāparānkleśānatitikṣanta pāṇḍavāḥyathā balīyasaḥ santastatsarvaṃ kuravo viduḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें