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महाभारत 5.31.6
तव प्रसादाद्बालास्ते प्राप्ता राज्यमरिंदमराज्ये तान्स्थापयित्वाग्रे नोपेक्षीर्विनशिष्यतः
tava prasādādbālāste prāptā rājyamariṃdamarājye tānsthāpayitvāgre nopekṣīrvinaśiṣyataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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