महाभारत 5.34.10
यः प्रमाणं न जानाति स्थाने वृद्धौ तथा क्षयेकोशे जनपदे दण्डे न स राज्येऽवतिष्ठते
yaḥ pramāṇaṃ na jānāti sthāne vṛddhau tathā kṣayekośe janapade daṇḍe na sa rājye'vatiṣṭhate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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