महाभारत 5.34.28
य एव यत्नः क्रियते परराष्ट्रावमर्दनेस एव यत्नः कर्तव्यः स्वराष्ट्रपरिपालने
ya eva yatnaḥ kriyate pararāṣṭrāvamardanesa eva yatnaḥ kartavyaḥ svarāṣṭraparipālane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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