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महाभारत 5.34.37
सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यतेमृजया रक्ष्यते रूपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते
satyena rakṣyate dharmo vidyā yogena rakṣyatemṛjayā rakṣyate rūpaṃ kulaṃ vṛttena rakṣyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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