महाभारत 5.34.39
न कुलं वृत्तहीनस्य प्रमाणमिति मे मतिःअन्त्येष्वपि हि जातानां वृत्तमेव विशिष्यते
na kulaṃ vṛttahīnasya pramāṇamiti me matiḥantyeṣvapi hi jātānāṃ vṛttameva viśiṣyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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