महाभारत 5.34.73
वाक्संयमो हि नृपते सुदुष्करतमो मतःअर्थवच्च विचित्रं च न शक्यं बहु भाषितुम्
vāksaṃyamo hi nṛpate suduṣkaratamo mataḥarthavacca vicitraṃ ca na śakyaṃ bahu bhāṣitum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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