महाभारत 5.34.79बुद्धौ कलुषभूतायां विनाशे प्रत्युपस्थितेअनयो नयसंकाशो हृदयान्नापसर्पतिbuddhau kaluṣabhūtāyāṃ vināśe pratyupasthiteanayo nayasaṃkāśo hṛdayānnāpasarpatiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें