महाभारत 5.35.57
दिवसेनैव तत्कुर्याद्येन रात्रौ सुखं वसेत्अष्टमासेन तत्कुर्याद्येन वर्षाः सुखं वसेत्
divasenaiva tatkuryādyena rātrau sukhaṃ vasetaṣṭamāsena tatkuryādyena varṣāḥ sukhaṃ vaset
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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