महाभारत 5.36.26
देवद्रव्यविनाशेन ब्रह्मस्वहरणेन चकुलान्यकुलतां यान्ति ब्राह्मणातिक्रमेण च
devadravyavināśena brahmasvaharaṇena cakulānyakulatāṃ yānti brāhmaṇātikrameṇa ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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