महाभारत 5.36.29
वृत्ततस्त्वविहीनानि कुलान्यल्पधनान्यपिकुलसंख्यां तु गच्छन्ति कर्षन्ति च महद्यशः
vṛttatastvavihīnāni kulānyalpadhanānyapikulasaṃkhyāṃ tu gacchanti karṣanti ca mahadyaśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें