महाभारत 5.36.38
चलचित्तमनात्मानमिन्द्रियाणां वशानुगम्अर्थाः समतिवर्तन्ते हंसाः शुष्कं सरो यथा
calacittamanātmānamindriyāṇāṃ vaśānugamarthāḥ samativartante haṃsāḥ śuṣkaṃ saro yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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