महाभारत 5.36.39
अकस्मादेव कुप्यन्ति प्रसीदन्त्यनिमित्ततःशीलमेतदसाधूनामभ्रं पारिप्लवं यथा
akasmādeva kupyanti prasīdantyanimittataḥśīlametadasādhūnāmabhraṃ pāriplavaṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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