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महाभारत 5.36.61
अथ ये सहिता वृक्षाः संघशः सुप्रतिष्ठिताःते हि शीघ्रतमान्वातान्सहन्तेऽन्योन्यसंश्रयात्
atha ye sahitā vṛkṣāḥ saṃghaśaḥ supratiṣṭhitāḥte hi śīghratamānvātānsahante'nyonyasaṃśrayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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