महाभारत 5.37.55
सर्पश्चाग्निश्च सिंहश्च कुलपुत्रश्च भारतनावज्ञेया मनुष्येण सर्वे ते ह्यतितेजसः
sarpaścāgniśca siṃhaśca kulaputraśca bhāratanāvajñeyā manuṣyeṇa sarve te hyatitejasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें