महाभारत 5.38.44
तं द्रक्ष्यसि परिभ्रष्टं तस्मात्त्वं नचिरादिवऐश्वर्यमदसंमूढं बलिं लोकत्रयादिव
taṃ drakṣyasi paribhraṣṭaṃ tasmāttvaṃ nacirādivaaiśvaryamadasaṃmūḍhaṃ baliṃ lokatrayādiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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