Loading
महाभारत 5.39.17
श्रेयसा योक्ष्यसे राजन्कुर्वाणो ज्ञातिसत्क्रियाम्विगुणा ह्यपि संरक्ष्या ज्ञातयो भरतर्षभ
śreyasā yokṣyase rājankurvāṇo jñātisatkriyāmviguṇā hyapi saṃrakṣyā jñātayo bharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें