महाभारत 5.39.42कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवतेतदेवापहरत्येनं तस्मात्कल्याणमाचरेत्karmaṇā manasā vācā yadabhīkṣṇaṃ niṣevatetadevāpaharatyenaṃ tasmātkalyāṇamācaretइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें