महाभारत 5.39.51
अग्निहोत्रफला वेदाः शीलवृत्तफलं श्रुतम्रतिपुत्रफला दारा दत्तभुक्तफलं धनम्
agnihotraphalā vedāḥ śīlavṛttaphalaṃ śrutamratiputraphalā dārā dattabhuktaphalaṃ dhanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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