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महाभारत 5.39.66
न स्वप्नेन जयेन्निद्रां न कामेन स्त्रियं जयेत्नेन्धनेन जयेदग्निं न पानेन सुरां जयेत्
na svapnena jayennidrāṃ na kāmena striyaṃ jayetnendhanena jayedagniṃ na pānena surāṃ jayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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