महाभारत 5.4.13
आनीयतां बृहन्तश्च सेनाबिन्दुश्च पार्थिवःपापजित्प्रतिविन्ध्यश्च चित्रवर्मा सुवास्तुकः
ānīyatāṃ bṛhantaśca senābinduśca pārthivaḥpāpajitprativindhyaśca citravarmā suvāstukaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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