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महाभारत 5.4.16
जयत्सेनश्च काश्यश्च तथा पञ्चनदा नृपाःक्राथपुत्रश्च दुर्धर्षः पार्वतीयाश्च ये नृपाः
jayatsenaśca kāśyaśca tathā pañcanadā nṛpāḥkrāthaputraśca durdharṣaḥ pārvatīyāśca ye nṛpāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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