महाभारत 5.4.3
बलदेवस्य वाक्यं तु मम ज्ञाने न युज्यतेएतद्धि पुरुषेणाग्रे कार्यं सुनयमिच्छता
baladevasya vākyaṃ tu mama jñāne na yujyateetaddhi puruṣeṇāgre kāryaṃ sunayamicchatā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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