महाभारत 5.4.7
एतच्चैव करिष्यामो यत्नश्च क्रियतामिहप्रस्थापयाम मित्रेभ्यो बलान्युद्योजयन्तु नः
etaccaiva kariṣyāmo yatnaśca kriyatāmihaprasthāpayāma mitrebhyo balānyudyojayantu naḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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