महाभारत 5.41.4
धृतराष्ट्र उवाच · dhṛtarāṣṭra uvāca
किं त्वं न वेद तद्भूयो यन्मे ब्रूयात्सनातनःत्वमेव विदुर ब्रूहि प्रज्ञाशेषोऽस्ति चेत्तव
kiṃ tvaṃ na veda tadbhūyo yanme brūyātsanātanaḥtvameva vidura brūhi prajñāśeṣo'sti cettava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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