महाभारत 5.42.32
द्वाराणि तस्या हि वदन्ति सन्तो; बहुप्रकाराणि दुरावराणिसत्यार्जवे ह्रीर्दमशौचविद्याः; षण्मानमोहप्रतिबाधनानि
dvārāṇi tasyā hi vadanti santo; bahuprakārāṇi durāvarāṇisatyārjave hrīrdamaśaucavidyāḥ; ṣaṇmānamohapratibādhanāni
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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