महाभारत 5.45.7
द्वादशपूगां सरितं देवरक्षितम्मधु ईशन्तस्तदा संचरन्ति घोरम्योगिनस्तं प्रपश्यन्ति भगवन्तं सनातनम्
dvādaśapūgāṃ saritaṃ devarakṣitammadhu īśantastadā saṃcaranti ghoramyoginastaṃ prapaśyanti bhagavantaṃ sanātanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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