महाभारत 5.46.2
तस्यां रजन्यां व्युष्टायां राजानः सर्व एव तेसभामाविविशुर्हृष्टाः सूतस्योपदिदृक्षया
tasyāṃ rajanyāṃ vyuṣṭāyāṃ rājānaḥ sarva eva tesabhāmāviviśurhṛṣṭāḥ sūtasyopadidṛkṣayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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