महाभारत 5.48.44
पुरा युद्धात्साधु मन्ये पाण्डवैः सह संगमम्यद्वाक्यमर्जुनेनोक्तं संजयेन निवेदितम्
purā yuddhātsādhu manye pāṇḍavaiḥ saha saṃgamamyadvākyamarjunenoktaṃ saṃjayena niveditam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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