महाभारत 5.48.9एतौ हि कर्मणा लोकान्नन्दयामासतुर्ध्रुवौअसुराणामभावाय देवगन्धर्वपूजितौetau hi karmaṇā lokānnandayāmāsaturdhruvauasurāṇāmabhāvāya devagandharvapūjitauइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें