महाभारत 5.49.16
यः प्रमाणं महाराज धर्मे धर्मभृतां वरःअजातशत्रुणा तेन पाण्डवा अभ्ययुञ्जत
yaḥ pramāṇaṃ mahārāja dharme dharmabhṛtāṃ varaḥajātaśatruṇā tena pāṇḍavā abhyayuñjata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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