महाभारत 5.49.19
याज्ञसेनीमथो यत्र सिन्धुराजोऽपकृष्टवान्तत्रैषामभवद्द्वीपः कुन्तीपुत्रो वृकोदरः
yājñasenīmatho yatra sindhurājo'pakṛṣṭavāntatraiṣāmabhavaddvīpaḥ kuntīputro vṛkodaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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