महाभारत 5.49.20
यश्च तान्संगतान्सर्वान्पाण्डवान्वारणावतेदह्यतो मोचयामास तेन वस्तेऽभ्ययुञ्जत
yaśca tānsaṃgatānsarvānpāṇḍavānvāraṇāvatedahyato mocayāmāsa tena vaste'bhyayuñjata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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