महाभारत 5.49.23
कृष्णद्वितीयो विक्रम्य तुष्ट्यर्थं जातवेदसःअजयद्यः पुरा वीरो युध्यमानं पुरंदरम्
kṛṣṇadvitīyo vikramya tuṣṭyarthaṃ jātavedasaḥajayadyaḥ purā vīro yudhyamānaṃ puraṃdaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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