महाभारत 5.49.42
यः संश्रयः पाण्डवानां देवानामिव वासवःतेन वो वासुदेवेन पाण्डवा अभ्ययुञ्जत
yaḥ saṃśrayaḥ pāṇḍavānāṃ devānāmiva vāsavaḥtena vo vāsudevena pāṇḍavā abhyayuñjata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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