महाभारत 5.49.43
तथा चेदिपतेर्भ्राता शरभो भरतर्षभकरकर्षेण सहितस्ताभ्यां वस्तेऽभ्ययुञ्जत
tathā cedipaterbhrātā śarabho bharatarṣabhakarakarṣeṇa sahitastābhyāṃ vaste'bhyayuñjata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें